Monday, 13 May 2019

जुकाम, खांसी और गले में दर्द है सीजनल एलर्जी से कैसे बचें।

मौसम बदलने के कारण जो एलर्जी होती है उसे सीजनल एलर्जी कहते है, जिसमें जुकाम, खांसी, गला खराब होना और बुखार आदि शामिल है। बच्चा अगर बहुत ज्यादा थकान का शिकार होता हो, उसे सर्दी-जुकाम बना रहता हो, नाक में खुजली हो तो इसे एलर्जी हो सकती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक कमजोर बड़ो की तुलना में कमजोर होने के कारण बच्चे जल्दी एलर्जी का शिकार हो जाते है। गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के एचओडी एंड डारेक्टर डॉ सतीश कौल ने बच्चों को सीजनल एलर्जी से बचाने और इसके लक्षणों के बारे में कुछ सुझाव दिए हैं, जिनका सहारे आप अपने बच्चों को इस सीजनल एलर्जी से बचा सकते हैं।

जुकाम, खांसी और गले में दर्द है सीजनल एलर्जी से कैसे बचें।
झुखाम का इलाज


सीजनल एलर्जी से बच्चों में बीमारियां 

मौसम में बदलाव से बच्चों में दूषित पानी और खान-पान के कारण एलर्जी से दस्त, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती है।

सीजनल एलर्जी से बचाव के तरीके

  • अगर आप एलर्जी से बचना चाहते हैं, तो अपने घर के आस पास गंदगी को न रहने दें। 
  • अपने घरों में अधिक से अधिक खुली और ताजा हवा आने दें। 
  • जिन खाद्य पदार्थों से आपको एलर्जी होती है उन्हें न खाएं।
  • बरसात के मौसम में नमी से बचे और इसके अलावा एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में न जाएं।
  • बाहर निकलते समय मुंह पर ढ़क कर बाहर निकलें।  
  • पालतू जानवरों से दूर रहें। अगर उनसे एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें।
  • ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे। 
  • धूल मिटटी से बचें, यदि धूल मिट्टी भरे वातावरण में काम कर रहे है तो फेस मास्क पहन कर काम करें

सीजनल एलर्जी से उपचार के तरीके

बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से उपचार के लिए हमें एलर्जी से बचाव करना चाहिए। बाहर निकलते समय मुंह ढ़क कर निकलना, बाहर का भोजन न करना, मार्केट में मिलने वाले पेय पदार्थ जैसे कोल्ड ड्रीक, गन्ने का जूस, गोलगप्पे के सेवन से बचें। इन उपायों से आप बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बच सकते है। 

माता-पिता बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचाएं और उन्हें कैसे इससे दूर रखें?

बच्चों को बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बचाने के लिए माता-पिता को अपने बच्चे पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चे को धुल- मिट्टी से एलर्जी है तो बाहर खेलने के दौरान नाक पर कपड़ा बांधकर रखना चाहिए। इसके लिए बच्चों को बाहर का खाना, गोलगप्पे, गन्ने का जूस नहीं देना चाहिए। जितना हो सके बच्चों को घर का बना हुआ फ्रेश खाना की खिलाएं, बासी खाना ना दें। उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर ओआरएस का घोल पिलाएं।

Friday, 3 May 2019

This Woman Makes Herself Have Sex Daily for a Crazy Reason—and Even Tracks It on a Spreadsheet.

You schedule plans with friends and important work meetings. But scheduling sex? It's not as unromantic as you might think. In fact, putting a daily romp into your Google calendar could give your sex life the jolt it needs.


Love



Take it from Good Morning Britain host Kate Garraway, who revealed that she schedules her sex sessions with the help of a spreadsheet. According to sex experts, she’s onto something. 
In her 2017 book, The Joy of Big Knickers, Garraway shared how she and her husband went on a 14-day sex challenge that had them penciling sex into their schedule every single day for two weeks. 




Love image

"When you've been in a relationship for a long time, the physical side of things can be very unspontaneous," Garraway told The Sunwww.only4you.xyz. "So the idea is to schedule sex and force yourself to do it once a day and make it the focus of your diary."

“I prescribe this all the time to my couples,” says Richmond. “If a couple comes in to me and tells me they’re not having as much sex as they want, I tell them that the best way to get back on the horse is absolutely to schedule sex. And I know this doesn’t sound romantic, but what it’s about is building those habits and routines, and having sexuality be the norm.”
Richmond tells her clients that penciling in sex is a great short-term solution. But instead of 14 days straight, she says she typically advises couples to start with a more realistic goal of having sex three to four days a week.
Don’t think you can swing a sex session that often? Richmond says quickies are great, too—as long as you're still managing one day a week to devote to least one hour of lovemaking. 
“Fourteen days of sex can be a great challenge, but the main purpose of scheduling sex is to cultivate partnership and create a time they can look forward to,” says Richmond. “I recommend doing it at different times of the day so it doesn’t feel like a chore, but rather to recreate novelty.”
Richmond says that the idea of creating a "challenge" can add to the fun and help mix things up for couples who may still have enough sex yet really want to try something new.
With all this in mind, break out your daily planner—at the very least, scheduling sex is worth a go.

Saturday, 6 April 2019

5 Adverse Effects of Bad ,

5 Adverse Effects of Bad Posture You Must Know


Poor Digestion

Yes, it might be very surprising but your poor posture can lead to poor digestion. It can mess with your gut health. A poor posture affects the different organs required for digestion which leads to poor gut health. You are more likely to experience constipation due to poor posture.



Foot pain

Poor posture can affect your feet as well. The improper alignment of different organs leads to pain in feel which can make it difficult for you to complete day to day tasks. Hence you should improve your posture to keep your each body part fit and fine.



Headaches

The work pressure and the stress is not the only reason behind those headaches. A bad posture puts stress on your neck and head as well which contributes to headaches. Headaches can reduce your ability to complete a particular task. Correct your posture immediately to avoid headaches.




Inability to sleep

Poor posture can affect your sleep as well. A misaligned posture leads to stress on various muscles. It does not allow you to sleep properly. You won't be able to relax properly. Not just your sitting posture you should also improve your sleeping position for a good night's sleep.

More stress

Isn't the work pressure and other responsibilities enough to give you a lot of stress? But you are simply increasing stress with a bad posture. A poor posture increases both mental and physical stress. Bad posture can also create a hormonal imbalance which increases the level of cortisol and triggers stress.


Wednesday, 3 April 2019

5 कैंसर बढ़ रहे हैं सबसे ज्यादा, जानें इनके बारे में

 कैंसर एक खतरनाक बीमारी है ।जिसका कोई भी इलाज नहीं है ।अगर शुरुआत में ही इस बीमारी का पता चल जाता है तो व्यक्ति की जान बच सकती है।

  • अब तक 100 से भी ज्यादा प्रकार के कैंसरों को खोजा जा चुका है।

कैंसर जानलेवा और गंभीर बीमारी है, जो हर साल लाखों लोगों की जिंदगियां छीन रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार आज दुनियाभर में होने वाली हर 6 में से 1 व्यक्ति की मौत का कारण कैंसर है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब तक 100 से भी ज्यादा प्रकार के कैंसरों को खोजा जा चुका है। इनमें से कुछ कैंसर ऐसे हैं, जो सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। आइए आपको बताते हैं दुनियाभर और भारत में कौन से कैंसर से सबसे ज्यादा कॉमन और इनके बारे में।

Cancer


ब्रेस्ट कैंसर

भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। ब्रेस्ट कैंसर के 60% से ज्यादा मामलों में इसका पता एडवांस स्टेज में चलता है, जिससे मरीज को बचाने की संभावना कम हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में स्तनों में गांठ, स्तनों के आकार में बदलाव, निप्पल से सफेद पानी का रिसाव और तेजी से वजन कम होना आदि हैं। खास बात यह है कि स्तन कैंसर सिर्फ महिलाओं ही नहीं पुरुषों को भी हो सकता है।


मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर)

भारतीय पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। इसका कारण यह है कि भारत में लोग तंबाकू, गुटखा, पान-मसाला, सिगरेट, बीड़ी, सुपारी आदि का सेवन बहुत करते हैं। मुंह के कैंसर की सबसे बड़ी वजह तंबाकू है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार भारत में मुंह के कैंसर के मरीजों में 40.43% से ज्यादा मामलों में इसका प्रमुख कारण तंबाकू का सेवन होता है।
मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में मुंह तथा जीभ की सतह पर लाल अथवा सफेद रंग के दाग-धब्बों का उभरना, मुंह में छाले, तीन हफ्तों से अधिक बने रहने वाली सूजन, त्वचा या मुंह की सतह में गांठ, निगलने में परेशानी, गले में दर्द, जीभ में दर्द, आवाज में भारीपन आदि हैं।

सर्वाइकल कैंसर

भारत में कैंसर से होने वाले मौतों में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे ज्यादा महिलाओं की मौतें सर्वाइकल कैंसर के कारण हो रही हैं। सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में होता है, जो महिलाओं के गर्भाशय के नीचे का एक हिस्सा है। महिलाओं में होने वाले इस कैंसर के लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जैसे- पीरियड्स में अनियमितता, वजाइना से सफेद पदार्थ निकलना, पेट के निचले हिस्से में दर्द, जल्दी-जल्दी पेशाब आना आदि। यही कारण है कि ज्यादातर महिलाएं सर्वाइकल कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं।


फेफड़ों का कैंसर

फेफड़ों का कैंसर भी भारत में भयावह रूप ले चुका है। फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण सिगरेट, बीड़ी, वायु प्रदूषण, गुटखा और ई-सिगरेट्स आदि हैं। भारत में फेफड़ों के कैंसर से महिलाओं से ज्यादा पुरुष प्रभावित होते हैं। गले और चेहरे पर सूजन आना, जोड़ों, पीठ, कमर और शरीर के अन्य भागों में दर्द रहना, लंबे समय तक खांसी रहना, सीने में दर्द और बलगम में खून आना, सांस लेते वक्त कठिनाई महसूस होना आदि लंग्स कैंसर के संकेत हैं।

कोलन कैंसर

कोलन कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत में भी कोलन कैंसर के मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। आमतौर पर कोलन कैंसर का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जो तंबाकू, शराब, रेड मीट आदि का ज्यादा सेवन करते हैं। जिन लोगों को इन्फ्लेमेट्री बॉवल डिजीज होता है, उनको कोलन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।

Sunday, 31 March 2019

सोने से दूध में दालचीनी मिलाकर पीने से दूर होता है जोड़ों का दर्द और मोटापा

हैलो दोस्तो आजकल शरीर ओर जोड़ो के दर्द से हर कोई परेशान रहता है ।इसके लिए आप कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर इन बीमारियों से दूर रह सकते है। अपने औषधीय गुणों के साथ-साथ विशिष्ट स्वाद और खुशबू तौर पर भी जानी जाती है। इस लोकप्रिय औषधीय मसाले का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, मीठे और नमकीन व्यंजनों, अनाज के नाश्तों, बेक्ड माल और स्नैक्स में किया गया है। यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुणों से भरा हुआ है। दालचीनी के फायदों को अगर लेना चा‍हते हैं इसे आप दूध के साथ ले सकते हैं। इसके अलावा एक और अच्छा तरीका है कि दालचीनी की छड़ को पानी में भिगोएँ और नियमित रूप से उसे पीएं। हालांकि यहां हम आपको सिर्फ दूध के साथ लेने की सलाह दे रहे हैं और इससे होने वाले फायदों के बारे में विस्‍तार से बता रहे हैं।



दालचीनी के फायदे
दालचीनी


दालचीनी की सूखी पत्तियां तथा छाल को मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के भूरे रंग की होती है। दालचीनी मोटापा कम करने के साथ-साथ कई बीमारियों को भी दूर करता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप दालचीनी का दूध के साथ सेवन करते हैं तो आपको कितने फायदे होंगे। साथ ही दालचीनी के साथ शहद मिलाकर खाने से दिल की बीमारियां, कोलेस्ट्रॉल, त्वचा रोग, सर्दी जुकाम, पेट की बीमारियों के लिए फायदेमंद है। आइए जानते हैं और किन बीमारियों के लिए फायदेमंद है दालचीनी:

दालचीनी के फायदे

सर्दी-जुकाम और बुखार में है फायदेमंद

आजकल के मौसम में वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम एक आम समस्या हो गई है। ऐसे में दूध के साथ या एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम लेने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है।

मोटापे से दिलाए छुटकारा

मोटापे जैसी समस्या के लिए भी दालचीनी फायदेमंद है। साफ पानी में 1 चम्मच दाल चीनी पाउडर मिलाकर इसे उबालें। फिर इसमें दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह—शाम लें। नियमित ऐसा करने से शरीर की अनावश्यक चर्बी का सफाया होता है।

गले की खराश दूर करे

गले में खराब होने पर भी दालचीनी फायदा करती है। गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर तथा एक चुटकी पिसी काली मिर्च दूध के साथ मिलाकर पीएं। 2 से 3 बार ही इस मिश्रण के सेवन से आपको गले की खराश से आराम मिल जाएगा।

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दिल के रोगों में है लाभकारी

दिल के दौरे की संभावना को भी दालचीनी खत्म करता है। जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक का दौरा पड़ चुका है वे अगर दालचीनी का साबुत सेवन करेंगे तो भविष्‍य में हार्ट अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है।


जोड़ों के दर्द से दिलाता है आराम

जोड़ों के दर्द के लिए भी दालचीनी लाभकारी है। हल्के गर्म पानी के साथ दालचीनी पाउडर का नियमित सेवन करने से आपको समस्या से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा आप दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर शरीर में दर्द वाले अंग पर हल्‍के हाथों से मालिश भी कर सकते हैं। दर्द से राहत मिलेगी।


कब्‍ज और गैसे दिलाए मुक्ति


कब्ज, गैस और अपच जैसी पेट की समस्‍या के लिए भी दालचीनी किसी चमत्कार से कम नहीं है। दूध के साथ थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर लेने से पेट दर्द और एसिडिटी में आराम मिलता है तथा भोजन भी आसानी से पच जाता है।

केरल की वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगें राहुल गांधी, जानें क्या है वजह.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इस बार का लोकसभा चुनाव दो जगह अमेठी और केरल की वायनाड लोकसभा सीट से लड़ेंगे। पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने आज मीडिया को यह जानकारी दी। इस मौके कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने राहुल गांधी दो जगह से चुनाव लड़ने का कारण बताया और कहा कि अमेठी राहुल गांधी की कर्मभूमि है वह हमेशा यहां से चुनाव लड़ते रहेंगे.


अहुल गांधी


वायनाड से चुनाव लड़ने का कारण-
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के अनुसार, केरल की वायनाड सीट दक्षिण भारत के तीन राज्यों से तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बीच में है इसलिए यहां से चुनाव लड़कर राहुल गांधी दक्षिण भारत के तीन राज्यों का प्रतिनिधित्व कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले काफी समय से तीनों राज्यों के लोगों की मांग थी कि राहुल गांधी उत्तर भारत के साथ ही दक्षिण भारत को भी अपना नेतृत्व प्रदान करें इसलिए राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। सुरजेवाला ने बताया कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत के खान-पान और संस्कृति में काफी अंतर है ऐसे में राहुल गांधी यहां से चुनाव लड़कर इस दो इलाकों की एकता को और मजबूती प्रदान करने का काम करेंगे।



केरल की 20 लोकसभा सीटों में से एक वायनाड भी है। केरल का यह जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वायनाड वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी के लिए मशहूर है। यहां हाथी और बाघ जैसे जानवार देखने को मिलते हैं। वायनाड एक अलग जिले के रूप में 1 नवंबर 1980 को अस्ति त्वल में आया। इसे कोझिकोड और कन्नूकर से अलग करके जिला बनाया गया था। यहां का व्यगथरी जैन मंदिर काफी प्रसिद्ध है। वायनाड में टीपू सुल्ता न के शासनकाल में अंग्रेजों ने हमला किया था। इस जिले की सीमाएं कर्नाटक और तमिलनाडु से मिलती हैं। वायनाड एक नवसृजित लोक सभा क्षेत्र है और इसमें 3-3 जिले कोझिकोड, वायनाड और मलप्पुसरम के 7 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। 
यहां की 93.15 फीसदी आबादी ग्रामीण है और महज 6.85 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं। पिछले बार के लोकसभा चुनाव में कुल 73 फीसदी यानि 915066 लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया ता, जिसमे से पुरुष मतदाताओं की संख्या 454300 और महिला मतदाताओं की संख्या 460706 है।

राजनीतिक इतिहास 

2008 में परिसीमन के बाद यह लोक सभा सीट घोषित हुई। यहां पहली बार 2009 में चुनाव हुए। पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस के एमआई शनावास जीते थे। उन्होंने अपने निकट्तम प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) कैंडिडेट एडवोकेट एम. रहमतुल्ला को 1,53,439 वोटों से हराया था।

प्रमुख राजनीतिक दल

यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां हैं कांग्रेस, सीपीआई, बीजेपी, एसडीपीआई, डब्लूीपीआई और आप हैं। निर्दलीय भी यहां से बड़ी संख्या  में अपना भाग्य  आजमाते रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव 2014

2014 के लोक सभा चुनाव में केरल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एमआई शनावास ही जीते थे। उन्हें  3,77,035 वोट मिले थे और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीपीआई उम्मीदवार पीआर सत्यन मुकरी को 20,870 वोटों से हराया था। शनावास केरल स्टूडेंट्स यूनियन के माध्यम से राजनीति में आए थे और उन्होंने युवा कांग्रेस तथा सेवा दल के लिए भी काम किया था।

लोकसभा क्षेत्र : वायनाड लोकसभा सीट
वायनाड की आबादी : 1827651
कुल मतदाता : 1249420
पुरुष : 614822
महिला : 634598
मतदान केंद्र : 1073
कुल वोट : 915138
2014 में मतदान : 73.25 प्रतिशत

Tuesday, 26 March 2019

बच्चो का मोटापा कैसे दूर करें।मोटापा

हैलो दोस्तो ।अगर आपका भी बच्चा जरूरत से ज्यादा मोटा या उसमे मोटापा बढ़ने लगता है ।तो ये अपके लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन जाती है।एक समय था जब डायबिटीज केवल वयस्‍कों में ही देखने को मिलती थी, लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाही से डायबिटीज बच्‍चों को भी अपना शिकार बनाता जा रहा है। लेकिन अगर माता-पिता चाहें तो अपने बच्‍चों की खानपान के प्रति आदतों को सुधार कर इससे दूर रख सकते हैं। बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिन्‍हें डायबिटीज में खाना हानिकारक होता है साथ ही इनके अत्‍यधिक सेवन से डायबिटीज होने का भी खतरा रहता है। तो आइए जानते हैं कि कौन से आहार आपके बच्‍चों की सेहत के लिए खतरा हैं।


Motapa kaise kam kare.
Motapa kaise door kare



फास्‍ट फूड:_


बच्चों में आमतौर पर हफ्ते में दो या दो से अधिक बार फास्ट फूड खाने की प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे में बच्चों के शरीर में फास्ट फूड के जरिये जो यह अतिरिक्त कैलोरी पहुँच रही है, वह उनकी शारीरिक गतिविधि से पूरी तरह खर्च नहीं होती है और इस कारण वे मोटापे के शिकार होने लगते हैं। मोटापे के कारण बच्चों में सांस की तकलीफ और मधुमेह जैसी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।

चॉकलेट, कैंडी और कुकीज:_


डायबिटीज में चीनी और चीनी से बने खाद्य-पदार्थों से परहेज करना चाहिए। ज्‍यादा चीनी वाले आहार जैसे - चॉकलेट, कैंडी और कुकीज में पोषक तत्‍व नही होते हैं और इनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है जिससे यह ब्‍लड में शुगर के स्‍तर को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा चीनी खाने से मोटापा बढ़ता है जो कि डायबीज के लिए खतरनाक है।

सॉफ्टड्रिंक:_


सॉफ्टड्रिंक बच्‍चों को बहुत पसंद होती है, जिसे बिना रोक टोक वो पीते हैं जबकि इसमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है, इसलिए इसके सेवन से ब्‍लड में शुगर को लेवल बढ़ा जाता है। इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत अधिक होती है। जो डायबिटीज होने में मदद करती हैं।

केक और पेस्‍ट्री:_

बच्‍चों को केक और पेस्‍ट्री की लत से दूर रखना चाहिए, क्‍योंकि केक को बनाते वक्‍त सोडियम, चीनी आदि का प्रयोग किया जाता है जो कि ब्‍लड में शुगर के लेवेल को बढ़ाता है। यह इंसुलिन के फंक्‍शन को भी प्रभावित करता है। इसके अलावा केक और पेस्‍ट्री दिल की बीमारियों को भी बढ़ाता है।